2 Line Shayari Yeh Inayate Gajab ki Yeh bala
2 Line Shayari for FB
यह इनाएतें गज़ब की यह बला की मेहेरबानीमेरी खेरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी
जरूरत है मुझे नये
नफरत करने वालाे की ।
पुराने ताे अब मुझे चाहने लगे है ।
पुराने ताे अब मुझे चाहने लगे है ।
चलते रहेगें शायरी
के दौर मेरे बिना भी…
एक शायर के कम हो जाने से शायरी खत्म नहीं हो जाती|
एक शायर के कम हो जाने से शायरी खत्म नहीं हो जाती|
सुनो तुम दिल
दुखाया करो इजाजत है
बस कभी भूलने की बात मत करना…
बस कभी भूलने की बात मत करना…
पंखों को खोल कि ज़माना सिर्फ उड़ान
देखता है,
यूँ जमीन पर बैठकर, आसमान क्या देखता है|
यूँ जमीन पर बैठकर, आसमान क्या देखता है|
ईश्क की गहराईयो
में खूब सूरत क्या है,
मैं हूं , तुम हो, और कुछ की जरूरत क्या है!
मैं हूं , तुम हो, और कुछ की जरूरत क्या है!
जब कभी टूट कर
बिखरो तो बताना हमको,
हम तुम्हें रेत के जर्रों से भी चुन सकते हैं|
हम तुम्हें रेत के जर्रों से भी चुन सकते हैं|
कुछ इस तरह फ़कीर
ने ज़िन्दगी की मिसाल दी,
मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी !
मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी !
तुम ना लगा पाओगे
अंदाजा मेरी तबाही का…!!
तुमने देखा ही कहाँ है मुझको शाम होने के बाद…!!
तुमने देखा ही कहाँ है मुझको शाम होने के बाद…!!
उन घरों में जहाँ
मिट्टी के घड़े रहते हैं,
क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं|
क़द में छोटे हों मगर लोग बड़े रहते हैं|
मरने के नाम से जो
रखते थे होठों पे उंगलियां,
अफसोस वही लोग मेरे दिल के कातिल निकले|
अफसोस वही लोग मेरे दिल के कातिल निकले|
सच्चाई थी पहले के
लोगों की जबानों में
सोने के थे दरवाजे मिट्टी के मकानों में !!
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सोने के थे दरवाजे मिट्टी के मकानों में !!
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